चर्चा-ए-आम

क्या यूपी में होगा कोई बड़ा सियासी खेला ?

कमल सेखरी

इस समय देश में कई बड़े मुद्दे दम भर भरके पुरजोरता से उठाए जा रहे हैं। गरीब श्रमिकों के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से पिछले बीस सालों से चलाई जा रही योजना महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा का यकायक नाम बदलकर जी राम जी कर दिया गया। इस नाम परिवर्तन में कई बड़े उतार-चढ़ाव जो हुए उस पर सियासी बहस अलग चल रही है। वहीं दूसरी ओर अभी तक कांग्रेस के प्रमुख नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भाजपा के नेतागण एक लंबे समय से रह रहकर जो मनी लॉड्रिंग के गंभीर आरोप लगा रहे थे उन आरोपों पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी को फटकार लगाते हुए यह कहकर मुकदमा खारिज कर दिया कि इसमें कोई आधार ही नहीं है। ईडी ने कांग्रेस के इन दोनों नेताओं पर 2 हजार करोड़ रुपए का गबन नेशनल हेराल्ड मामले में करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस को अब इन आरोपों से मुक्ति मिल गई है। एक अन्य बड़े मामले को लेकर देश की जनता काफी परेशान नजर आ रही है। हालांकि बंगाल की मतदाता सूची जो एसआईआर के बाद मंगलवार को सार्वजनिक की गई उसमें 58 लाख मतदाता पुरानी सूची से काटकर दिखाए गए हैं। इस कटौती के चुनाव आयोग ने कई कारण भी बताए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में जहां अभी एसआईआर 26 दिसंबर तक पूरी होनी है वहां चुनाव आयोग के जो बयान आ रहे हैं और उसके साथ सूबे के मुख्यमंत्री जो सार्वजनिक बयान दे रहे हैं और इनके जवाब में विपक्षी नेता सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव जो कह रहे हैं ये सभी बयान एक बड़ा संकट पैदा कर रहे हैं और प्रदेश के बुद्धिजीवियों को चिंता में भी डाल रहे हैं। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ने 15 नवंबर को एक बयान देकर कहा कि हमने एसआईआर की प्रक्रिया में 99.46 प्रतिशत फार्म जो घरों में बांटे थे उनमें से 99.24 प्रतिशत फार्म हमें वापस प्राप्त हो गए हैं लिहाजा एसआईआर का हमारा उददेश्य उत्तर प्रदेश में शत प्रतिशत सफल रहा है। जबकि इसके विपरीत उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने मीडिया को बताया कि हमें बांटे गए फार्मों में से अभी कुल 80.37 प्रतिशत फार्म ही मिले हैं। अभी भी हमारे बीएलओ 2.91 करोड़ मतदाताओं से संपर्क नहीं साध पाए हैं इसलिए एसआईआर की अंतिम तिथि 16 दिसंबर से बढ़ाकर 26 दिसंबर की जाए जो देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस आधार को मानते हुए एसआईआर की अंतिम तिथि 16 दिसंबर से बढ़ाकर 26 दिसंबर कर दी। ऐसा करने पर उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने मीडिया में काफी शोर मचाकर यह आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से 3 करोड़ वोट काटे जा रहे हैं जिनमें अधिकांश हमारे समर्थकों के हैं। 15 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के मुखिया प्रदेश निर्वाचन आयोग और सपा प्रमुख के बयानों से भी कई कदम आगे निकल गए, उन्होंने सार्वजनिक बयान में कहा कि प्रदेश में कुल आबादी 25 करोड़ की है जबकि मतदाताओं की सूची 16 करोड़ की है लेकिन एसआईआर के बाद जो संख्या सामने आने जा रही है वो लगभग 12 करोड़ है यानी 4 करोड़ मतदाता सूची में कम होते नजर आ रहे हैं। सूबे के प्रमुख का यह भी कहना था कि यह जांच का मामला है कि ंइतनी बड़ी संख्या में मतदाता कम क्यों हो रहे हैं और यह कम होती संख्या के लोग जा कहां रहे हैं। लिहाजा उत्तर प्रदेश की ये सियासी अटकलें और आने वाले संभावित चुनावी आंकड़े अभी से कुछ ऐसे संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में कोई बड़ा खेला होने जा रहा है।

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