उत्तर प्रदेश

रामराज्य में किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं: योगी

लखनऊ। भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कान्त, न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं न्यायाधीशगण डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षान्त समारोह में सम्मिलित हुए। न्यायमूर्ति सूर्य कान्त ने मुख्य अतिथि के तौर पर दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ किया। न्यायमूर्ति सूर्य कान्त तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को मेडल तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किये।
न्यायमूर्ति सूर्य कान्त ने विधि छात्र-छात्राओं के साथ अपने विधिक सफर के अनुभव साझा करते हुए कहा कि लीगल प्रोफेशन आपका प्रोफेशन सिर्फ इसलिए नहीं है कि यह आपके लिए एकमात्र रास्ता है, बल्कि इसलिए भी है कि आप ट्रांसफार्मेशन के लिए अच्छी तरह से तैयार हैं। मैं जो कहूंगा उसे शाम को हो सकता है भूल जाऊं, चाहे यह शब्दों में न याद रहें लेकिन जो सोचता हूँ उसके पीछे की भावना याद रहेगी। लॉयर्स की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वह कितना जानते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि उनके अन्दर जानने व सीखने की कितनी इच्छा है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था को सुलभ, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में दिए जा रहे दीक्षा उपदेश भारत की प्राचीन गुरुकुल परम्परा के समावर्तन समारोह का रुप है। तैत्तिरीय उपनिषद में दिए गए मंत्र सत्यं वद धर्मं चर अर्थात सत्य बोलना और धर्म का आचरण करना, इस दीक्षा उपदेश का महत्वपूर्ण अंग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन का सबसे स्वर्णिम और गौरवपूर्ण दिन है। आप सभी छात्र-छात्राओं ने भारत के लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तम्भ भारत की न्यायपालिका के शीर्ष न्यायमूर्तियों के कर-कमलों से उपाधि अर्जित की है। भारत की संसद तथा न्यायपालिका का बोध वाक्य धर्मां रक्षति रक्षित:, यतो धर्मस्ततो जय: भी इसी भाव के साथ हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव आगाह करता है। धर्म हमारे जीवन पद्धति का हिस्सा है। लोगों की आस्था के अनुरूप उपासना पद्धति अलग-अलग हो सकती है। धर्म के जिस दीक्षा उपदेश को यहां छात्र-छात्राओं ने ग्रहण किया है, वह उन्हें कर्तव्यों के प्रति निरन्तर प्रेरित करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य में किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं था। समाज के प्रत्येक तबके को समान रूप से योग्यता और क्षमता के अनुरूप व्यवस्था का हिस्सा बनने की अवधारणा को सुशासन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान होता है। न्यायिक व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने में उतनी ही आसानी होगी। प्रदेश सरकार द्वारा इसके दृष्टिगत व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य प्रारम्भ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कोर्ट प्रणाली, अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन और साइबर लॉ जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स और डिजिटल एजुकेशन की उपयोगिता को बढ़ाने हेतु न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान में नए हॉस्टल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आधुनिक प्रशिक्षण कक्षाओं का निर्माण कराया जा रहा है। न्यायिक अधिकारियों प्रॉसिक्यूटर्स, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का निरन्तर प्रशिक्षण तथा स्किल डेवलपमेन्ट के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृतकाल के प्रथम वर्ष में न्याय की धारणा पर आधारित तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियत-2023 को लागू किया गया है। इन्हें सफलतापूर्वक लागू करने में पूरा देश तेजी के साथ आगे बढ़ा है। रूल आॅफ लॉ, बेंच और बार के बेहतरीन समन्वय से ही आगे बढ़ सकती है। बेंच सामान्य रूप से एक आम मानविकी के विवेक और बार संवेदना का प्रतीक है। विवेक और संवेदना में समन्वय होता है, तो रूल आफ लॉ की परिकल्पना को मूर्त रूप में साकार होते देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बेंच और बार के मध्य बेहतर समन्वय हेतु इन्टीग्रेटेड कोर्ट परिसर बनाए जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत 10 जनपदों के लिए एक साथ धनराशि जारी की गई है। एक ही कैम्पस में जिले स्तर के सभी प्रकार के कोर्ट तथा बार के लिए व्यवस्था, आवास तथा अन्य सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, जनपदीय न्यायालयों के डिस्ट्रिक्ट जजों के चेम्बर में एसी लगाने की सहमति भी प्रदान की गई है। बार और बेंच के बीच में बेहतर समन्वय बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। डिजिटल डिपोजिशन राइटर की स्वीकृति दी गई है। आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय सुदृढ़ तथा बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों सम्बन्धी अपराधों में प्रभावी पैरवी कर त्वरित न्याय दिलाने हेतु 380 से अधिक पॉक्सो तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की कार्यवाही की गई है। लोक अदालत, मीडिएशन, आर्बिट्रेशन के माध्यम से भी त्वरित न्याय उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाए हैं। इसमें विधिक सेवा प्राधिकरण व न्यायालयों की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में प्रत्येक रेंज स्तर पर विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गइंर्, जिन्होंने कार्य करना प्रारम्भ कर दिया है।
राज्य स्तर पर यूपी स्टेट फॉरेंसिक इन्स्टीट्यूट का गठन किया गया है, जिसके माध्यम से अच्छे और दक्ष युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन्टरआॅपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को और सशक्त किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत ई-कोर्ट, ई-पुलिसिंग, ई-प्रॉसीक्यूशन, ई-फॉरेंसिक और ई-प्रिजिन को इन्टीग्रेटेड प्लेटफार्म के साथ जोड़ने की कार्यवाही की जा रही है। इस प्रणाली से न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। प्रत्येक व्यक्ति के लिए पारदर्शी और कुशल न्याय सुलभ कराने में सफल होंगे।
कार्यक्रम को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के विजिटर और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, अन्य जनप्रतिनिधि सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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