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महागठबंधन का आरोप, चुनाव आयोग की नीयत में खोट !

  • मतदाता सूची से काटी जाएंगी दो करोड़ वोट: सिंघवी
  • विपक्ष की कोई बात मानने को तैयार नहीं चुनाव आयोग
  • बिहार तोड़ेगा अश्लीलता के सभी पुराने रिकार्ड

कमल सेखरी
बीते दिन इंडिया गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार चुनाव को लेकर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त से उनके दिल्ली कार्यालय में मिला। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई राज्यसभा सदस्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी कर रहे थे, उनके साथ आरजेडी और लेफ्ट पार्टी के नेता भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। चुनाव आयुक्त से मिले प्रतिनिधिमंडल ने लिखित में शिकायत करते हुए कहा कि बिहार में जो मतदाता पुनरीक्षण का कार्य किया जा रहा है उसे तुरंत रुकवा जाए क्योंकि इस प्रक्रिया में बिहार के दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे। इसका कारण बताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अन्य राज्यों में इस समय फसलों के बुआई शुरू हो गई जिसमें बिहार से लाखों मजदूर काम करने के लिए अपने घरों पर ताला लगाकर बिहार से कूच कर गए हैं। ये लोग पुराने मतदाता हैं और पिछले कई चुनावों से लगातार वोट डालते आ रहे हैं और अक्सर हर चुनाव के मतदान के दिन तक वो जहां भी हों वहां से बिहार आकर अपनी वोट डालकर वापस लौट जाते हैं। लेकिन इस मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान वो लाखों की संख्या में बिहार में उपलब्ध नहीं होंगे लिहाजा उनकी वोट मतदाता सूची से काट दी जाएगी। इस प्रतिनिधिमंडल का यह भी कहना था कि इन दिनों बिहार में भारी बारिश होने के साथ-साथ अधिकांश नदियों में जनसैलाब उमड़ा हुआ है और बिहार के 70 फीसदी गांवों में लोगों के घर बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं अत: ऐेसे में मतदाता पुनरीक्षण कार्य की जटिल औपचारिकताआें को पूरा करना इन लोगों के लिए संभव ही नहीं है। इस प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयुक्त से यह अनुरोध भी किया कि एक माह में आठ करोड़ मतदाताओं की जांच करने का काम संभव ही नहीं है अत: मतदाता सूची की जांच का ये कार्य विधानसभा चुनाव के बाद शुरू कराया जाए। उनका यह भी कहना था जो विभिन्न आयु वर्ग के मतदाताओं के लिए हाईस्कूल का प्रमाण पत्र या माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र देखे जाने की जो शर्त चुनाव आयुक्त ने लगाई है उसे वापस लिया जाना चाहिए और आधार कार्ड व वोटिंग कार्ड के हिसाब से इस बार का विधानसभा चुनाव पूरा कराना चाहिए। बताया जाता है कि चुनाव आयुक्त ने इस प्रतिनिधि मंडल की कोई भी बात मानने से स्पष्ट मना कर दिया और कहा कि हम यह प्रक्रिया निर्धारित एक माह के समय में पूरी करा लेंगे। चुनाव आयुक्त से हुई बातचीत के बाद इंडिया गठबंधन के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें चुनाव आयुक्त की नीयत साफ नजर नहीं आ रही और इस बार मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पहले से निर्धारित धर्म और जाति के आधार पर लगभग दो करोड़ मतदाताओं के नाम चुनाव से पूर्व मतदाता सूची से हटाने का काम किया जा सकता है। बिहार चुनाव में हालांकि चार महीने का समय अभी बाकी है लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने अपेक्षा के वितरीत निम्न स्तर की प्रक्रियाएं अपनाते हुए एक दूसरे पर पुरजोर हमले करने शुरू कर दिये हैं। बिहार विधानसभा का यह चुनाव हिन्दू-मुस्लिम और जातीय उन्माद का सबसे बड़ा अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। भाजपा साम दंड भेद अपनाकर राज्य में एनडीए की वो सरकार लाना चाहती है जिसमें मुख्यमंत्री भाजपा का ही रहे। आने वाले चार महीेने निसंदेह गहमा-गहमी के ही रहने वाले हैं, जिनमें सभी राजनीतिक मापदंड भाषा का संतुलन तो समाप्त होगा ही अश्लीलता भी व्यापक स्तर पर परोसी जाएगी।

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