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भारत में अमेरिका के राजदूत के सम्मान में रात्रभोज में शरीक हुए डा.पीएन अरोड़ा व डा.उपासना अरोड़ा

गाजियाबाद। भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत एरिक गार्सेटी के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के सी.एम.डी. डॉ.पी.एन.अरोड़ा एवं प्रबंध निदेशिका (एमडी) डॉ. उपासना अरोड़ा ने भी शिरकत की। डा.पीएन अरोड़ा ने बताया कि हमें उनसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी बातचीत में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह रात्रिभोज 30 जून को नई दिल्ली के द ललित होटल में इंडो अमेरिकन चैंबर आॅफ कॉमर्स द्वारा आयोजित किया गया। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि इस बातचीत के दौरान हमारा प्राथमिक उद्देश्य उन संभावित रास्तों की खोज करना था जो भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की आधारशिला को और मजबूत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर से अमेरिका के लिए भारत बहुत मायने रखता है। इसमें इनके बीच व्यापार की भूमिका बहुत बड़ी है। यही वजह है कि दो साल में आपसी व्यापार में 48 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है।
2022-23 में अमेरिका हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। ये आंकड़े बताने के लिए काफी है कि दोनों देशों में आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि पूरी शाम के दौरान, हमारी चर्चाएं व्यापक विषयों पर आधारित रहीं, क्योंकि हमने अपने देशों के बीच व्यापार को मजबूत करने में सक्षम ठोस उपायों की पहचान करने की कोशिश की। साझा दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, हमने न केवल भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी परस्पर सहयोग को गहरा करने और चिकित्सा अनुसंधान, तकनीकी एवं प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने के लिए नवीन रास्ते तलाशने का भी प्रयास किया। भारत के लिए अमेरिका से व्यापारिक संबंध बढ़ना सामरिक नजरिए से भी काफी आवश्यक है। जैसा कि विदित है कि सीमा विवाद की वजह से चीन के साथ हमारे रिश्ते पिछले तीन-चार साल से लगातार खराब होते गए हैं। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और अमेरिका शोध एवं विकास अनुसंधानों में भारत की मदद करने की क्षमता रखता है। द्विपक्षीय व्यापार के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। भारत का अमेरिका में एक मजबूत प्रवासी बेस है जो अमेरिका को हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं, उनके द्वारा बनाये गए विभिन्न संगठन दोनों देशों के बीच पारस्परिक रिश्तों को मजबूत करने की बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी साथ लेकर कैसे चला जाए, इस पर भी बातचीत हुई।

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