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हम नदियों को प्लास्टिक रूपी जहर से दूषित न करें: सत्येन्द्र सिंह

-प्लास्टिक ने हमें गुलाम बना दिया है: यादव
-नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर चलाया गया जागरुकता अभियान
गाजियाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर उत्थान समिति ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भारतीय रेलवे के सहयोग से पहाड़गंज (प्लेटफॉर्म न -1) एवं अजमेरी गेट (प्लेटफॉर्म न -16) पर प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के विषय में लोगों को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जानकारी दी एवं पॉलिथीन की जगह जूट या कॉटन के बैग इस्तेमाल करने की सलाह दी। इस अवसर पर स्टेशन अधीक्षक महेश यादव मुख्य रूप से उपस्थित थे। उन्होंने कहा की प्लास्टिक एक ऐसा दानव है जो हजारों वर्षों तक भी समाप्त नहीं हो सकता है और इसकी वजह से हमारा वातावरण प्रदूषित हो रहा है और हम इसके गुलाम होते जा रहे हंै। हमें प्लास्टिक के विकल्प के विषय में गंभीरता से सोचना होगा तभी कुछ निदान संभव है। इस अवसर पर उत्थान समिति के चेयरमैन एवं पर्यावरणविद सत्येन्द्र सिंह ने कहा की प्लास्टिक की वजह से पृथ्वी पर मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते जा रहे हैं और समुद्रों में रहने वाले जीव, मछलियाँ इनकी चपेट में आकर या मनुष्यों द्वारा समुद्र में फेंके गए प्लास्टिक के कचड़ों की वजह से मरती जा रही हैं। जो की एक खतरनाक संकेत है।
हमें अभी से सतर्क होना होगा अन्यथा इसके दुष्परिणाम बहुत ही खतरनाक होंगे। इस अवसर पर रेलवे की तरफ से शैलेन्द्र सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे। उत्थान समिति की टीम द्वारा इस अवसर पर लगभग 10 हजार लोगों को कॉटन एवं जूट के बैग बाँटे गए। जिसका मकसद सिर्फ यह था की लोग प्लास्टिक को ना कहें और कॉटन या जूट के बैग को हाँ कहें। द्रौपदी एक आवाज की निदेशक अदिति उन्मुक्त ने यह भी समझाया कि जब भी आप बाजार या मॉल से शॉपिंग करने जाएं तो अपने घर से कॉटन या जूट का थैला लेकर जाएं ताकि पॉलिथीन का उपयोग बंद किया जा सके।
इसके पहले उत्थान समिति ने फाइब्रोस के सहयोग से हिंडन नदी के किनारे प्लास्टिक का कचरा साफ किया तथा उत्थान समिति के चेयरमैन एवं पर्यावरणविद सत्येन्द्र सिंह ने यह सन्देश दिया की हम नदियों को प्लास्टिक रूपी जहर से दूषित न करें और इसको साफ करने में अपना योगदान दें। गाजियाबाद में हिण्डन नदी लगभग विलुप्त होने की कगार पर है। जिस नदी में कभी स्वच्छ जल बहा करता था उसमे आज इतनी गन्दगी हो गयी है कि आॅक्सीजन भी इसके पानी में नहीं है जिसके कारण कोई भी जलीय जंतु इस नदी में जीवित नहीं रह पाता है। इस अवसर पर बबिता, प्रतिमा, अवधेश एवं उत्थान की टीम के अन्य सदस्य इत्यादि लोग मौजूद थे।

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