कौन रोकेगा ट्रंप की बदजुबानी

कमल सेखरी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रह रहकर ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे 148 करोड़ आबादी वाले हमारे भारत देश का निरंतर अपमान हो रहा है। आपरेशन सिंदूर के सीज फायर वाले ट्रंप के चर्चित बयान से तो हम पहले ही काफी दुखी थे उन्होंने उसी दौरान हमारे लड़ाकू जहाजों के गिरने पर भी बयान दे दिया। और जब उन्हें ऐसे बयान लगातार देते रहने से हम रोक नहीं पाए तो उन्होंने यह बयान भी दे दिया कि भारत की आर्थिक स्थिति मरी हुई है यानी भारत की इकोनोमी एक डेड इकोनोमी है। हम एक तरफ अपने भारत को विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ता बताते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को विश्व की पांचवीं मजबूत आर्थिक स्थिति बताते नहीं थकते ऐसे में बड़े मुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमारी उसी आर्थिक स्थिति को मरी हुई आर्थिक स्थिति घोषित कर रहे हैं। और उसी आर्थिक स्थिति के भारत से अब तक घोषित 25 प्रतिशत आयात शुल्क की जगह उसे बढ़ाकर अब दोगुना यानी 50 प्रतिशत कर दिया। अब डोनाल्ड ट्रंप को ऐसा करने और बोलने से कौन रोकेगा, कहीं तो हमें खड़े होकर इसका खुले शब्दों में विरोध करके अपनी नाराजगी जाहिर करनी ही होगी। लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे। हम ट्रंप की बदजुबानी को एकतरफा सुनते चले आ रहे हैं और मूकदर्शक बने बैठे हैं। यह तो राजनीतिक शतरंज के खेल का नियम है कि आप बादशाह को छोटे पियादों से नहीं मात दे सकते। हर लड़ाई का उसूल होता है जब एक एक तरफ से राजा निकलकर आता है और किसी देश के खिलाफ बदजुबानी की हुंकारे भरता है तो यह तकाजा है कि उस देश के राजा को भी खुद निकलकर सामने आना चाहिए और राजा के सामने खड़ा होकर दो टूक उसी जुबान में जवाब देना चाहिए जिस जुबान में सामने वाला राजा बोल रहा हो। अब इस मामले में हमारे प्रधानमंत्री क्यों खामोश हैं और क्यों खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं यह तो वो जाने लेकिन दुनियाभर के लोग और अपने देश का अवाम ही यह सोचने लगा है कि हमारी ऐसी क्या कमजोरी है जो हम बदजुबानी में लगाए जा रहे आरोपों का जवाब खुलकर क्यों नहीं दे पा रहे हैं। हम शालीनता में विश्वास रखते हैं तो भी मुलायम शब्दों में अपने मतलब की कठोर बातों को ट्रंप तक पहुंचाया जा सकता है। अब लोग उपहास करते हुए यह भी कहने लगे हैं कि हम ट्रंप को तो क्या रोकेंगे हमसे तो एक कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य ही नहीं रोका जा पा रहा है। हम सरकारी नीति के तहत अपने देश की महिलाओं को सम्मानजनक स्थिति में रखना चाहते हैं और महिला सशक्तिकरण के नाम से हमारी सरकारें कई योजनाएं भी चला रही हैं। अब ऐसे एक कथा वाचक पिछले कई दिनों से निरंतर महिलाओं के अपमान में अश्लील अपशब्द बोल रहा है और हमारे उत्तर पदेश की सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इतना ही नहीं आज सुबह उनसे उनकी इन्हीं बातों के संबंध में देश की एक बड़े टीवी चैनल की महिला पत्रकार कुछ सवाल पूछने गई तो कथावचाक अनिरुद्धाचार्य की उपस्थिति में उनके भक्तों ने मिलकर उस महिला पत्रकार को बुरी तरह से मारापीटा, उसके बाल खींचे और इस दौरान आचार्य मंद मंद मुस्कुराते रहे। कैमरा और माइक छीनने की कोशिश की गई, वहां उपस्थित सीआरपीएफ के जवानों ने बड़ी मुश्किल से महिला पत्रकार को भक्तों की उस भीड़ से बाहर निकाला। क्या हमारे सरकारों को कुछ भी सुनने की आदत सी पड़ गई है। ट्रंप से लेकर कथावाचक तक जो चाहे कुछ भी बोले, कुछ भी करे हम मुंह में दही जमाए खामोश बैठे रहेंगे, कोई कार्रवाई भी नहीं करेंगे। तब कैसे चल पाएगा कार्रवाई शून्य है, यह देश जो कभी अपने मान सम्मान और पहचान को कायम रखने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता था। इतिहास के पृष्ठों पर नए भारत की यह नई खामोशी भी अंकित होगी पीढ़ियां इसे जानेंगी।


