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केआईईटी की छात्रा झलक सक्सेना ने महिलाओं के खिलाफ भेदभाव पर समाज को दिया बड़ा संदेश

गाजियाबाद। केआईईटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस में कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा महिलाओं के खिलाफ भेदभाव विषय पर एक पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया। संस्थान 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक महिलाओं के खिलाफ भेदभाव पर पखवाड़ा आयोजित कर रहा है, जिसके अंतर्गत सभी सीएस छात्रों ने पोस्टर के माध्यम से अपने विचारों को चित्रित किया और समाज को यह संदेश साझा किया कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न या भेदभाव एक अभिशाप है।
प्रतियोगिता की शुरूआत जनसंपर्क और अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की प्रमुख एवं प्रतियोगिता की जज, डॉ. प्रीति चिटकारा के अभिनंदन के साथ हुई। सभी प्रतिभागियों ने अपने पोस्टरों की व्याख्या की और अपने विचार साझा किए कि कैसे यौन या लिंग-आधारित भेदभाव की इस स्थिति को समाप्त किया जा सकता है।
झलक सक्सेना (सीएस द्वितीय वर्ष) प्रतियोगिता की विजेता रही। उसने 10 से 12 और 22 से 24 की उम्र के बीच एक महिला की यात्रा के बारे में बताया। 10 से 12 के बीच, एक लड़की बहुत जीवंत होती है, अनगिनत रंग पहनती है, बेफिक्र महसूस करती है और सुखी जीवन जीने की आशा करती है। हालांकि, 22 से 24 की उम्र के बीच, एक लड़की पर शादी के बंधन में बंधने के लिए दबाव डाला जाता है, उसे एक बेहद ही समझदार इंसान की तरह व्यवहार करने के लिए कहा जाता है ताकि समाज उसे स्वीकार करे। एक अन्य प्रतिभागी ने एक महिला के दो चेहरे बताए, जिसमें एक तरफ वह घर के सारे काम संभाल रही है, कड़ी मेहनत कर रही है, प्रतियोगिताओं में जीत रही है और दूसरी तरफ वह लिंग-भेद, पीड़ा के कारण कार्यस्थल पर गंभीर भेदभाव का सामना कर रही है, कार्यस्थलों पर चाइल्ड कैयर की अनुपलब्धता के कारण मुश्किलों का सामना कर रही है और यौन उत्पीड़न से अकेले ही जूझ रही है। प्रतियोगिता का आयोजन डा. अजय कुमार श्रीवास्तव (एचओडी सीएस) और आरती शर्मा (सहायक प्रोफेसर और महिला सेल समन्वयक, सीएस विभाग) के कुशल मार्गदर्शन में किया गया था।

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