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सार्वजनिक नोटिस और आदेशों के बाद भी नहीं तोड़ा जा रहा जर्जर श्याम सिंह बिल्डिंग के शेष भाग को

-एक बार फिर नगर पालिका ने बिल्डिंग तोड़ने को किया है सार्वजनिक नोटिस जारी
-आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट व जीडीए व पीडब्ल्यूडी की संयुक्त समिति की रिपोर्ट को किया जा रहा दरकिनार
-बिल्डिंग स्वामी पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के लिए जमा कर चुका डेढ़ लाख का राजस्व
-डर है कि कहीं मुरादनगर श्मशान घाट जैसा हादसा न हो जाए
मोदीनगर।
है न अजीब बात। एक जर्जर बिल्डिंग को गिराने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं। जब यही जर्जर बिडिंग गिरकर हादसे का सबब बन जाएगी तब सारा दोष प्रशासन बिल्डिंग के मालिक के ऊपर मढ़ देगा। ऐसा ही कुछ हो रहा है श्याम सिंह बिल्डिंग को गिराने के मामले में। इस बिल्डिंग को गिराने में कितनी अड़चनें आएंगी ऐसा बिल्डिंग मालिक ने भी नहीं सोचा था। दरअसल साठ साल पुरानी यह बिल्डिंग श्याम सिंह बिल्डिंग के नाम से मशहूर है। गंदे नाले से सटी यह बिल्डिंग जब जर्जर हो गई तो इसके मालिक अंकुर नेहरा ने रुड़की आईआईटी से इसकी जांच कराई। रुड़की आईआईटी के विशेषज्ञों ने इस बिल्डिंग को बेहद खतरनाक स्थिति में बताते हुए तुरंत गिराने की बात कही। इस बिल्डिंग को गिराने के लिए नगर पालिका परिषद, तहसील प्रशासन और पुलिस से मदद मांगी गई। नोटिस मिलने के बाद 28 नवंबर 2020 को बिल्डिंग स्वामी ने उसे गिराने का शुरू किया। इसको लेकर भी खूब हो हल्ला हुआ। सत्तर से अस्सी फीसदी बिल्डिंग को तोड़ दिया गया। बिल्डिंग में अभी भी आधा दर्जन किराएदार हैं जो बार-बार आग्रह करने के बाद भी बिल्डिंग को खाली नहीं कर रहे हैं। हालांकि तूल दिए जा रहे इस मामले को जैसे-तैसे निपटाया गया। तहसील प्रशासन ने इसमें संयुक्त समिति गठित की। बिल्डिंग के मालिक अंकुर नेहरा ने बताया कि समित में जीडीए व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने अपनी रिपोर्ट सबमिट की। रिपोर्ट में भी बिल्डिंग को बेहद खतरनाक बताया गया। चूंकि बिल्डिंग के बेसमेंट की दुकानें गिराने का काम होगा तो मुख्य मार्ग पर लोग चोटिल न हो या फिर कोई हादसा न हो तो पुलिस सुरक्षा की आवयश्यकता बताई गई। इसके लिए अंकुर नेहरा ने पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए का राजस्व भी जमा कर दिया। तय तिथि को पालिका की टीम नहीं पहुंची और बिल्डिंग के शेष भाग को नहीं गिराया जा सका। शेष बिल्डिंग को गिराने के लिए फिर राजनीति शुरू हो गई। जितने पुलिसकर्मियों की डिमांड की गई थी उतना पुलिस फोर्स भी नहीं आया। चार मार्च 2021 को पालिका प्रशासन ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया और सात दिन के भीतर बिल्डिंग को खाली करने और उसे तोड़ने की बात की। लेकिन मार्च का पूरा महीना निकल गया, अप्रैल का भी पूरा माह निकल गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 28 मई 2021 को फिर नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर दो दिन का समय दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि बिल्डिंग को खाली कर दिया जाए ताकि इसे तोड़ा जा सका। यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि बिल्डिंग तोड़ने में किसी ने अड़चन पैदा की तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि इस नोटिस पर बिल्डिंग को तोड़ा जाता है या नहीं। या फिर इस मामले को लेकर राजनीति गर्माई जाती है। यदि ऐसा हुआ तो आशंका जताई जा रही है अब जो बारिश होगी उसमें यह बिल्डिंग खुद ही धराशायी न हो जाए, और कहीं इससे कोई जनहानि न हो जाए। बिल्डिंग स्वामी अंकुर नेहरा ने मांग की है कि पालिका प्रशासन को इस पर गंभीरता से कार्य करते हुए बिल्डिंग को तुरंत गिराने की कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

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