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जिले में 137 एचडब्ल्यूसी, पीएचसी और सीएचसी पर हुआ निक्षय दिवस का आयोजन

  • अब तक हुए 10 निक्षय दिवसों में 1471 संभावित रोगियों की हुई जांच
  • कुल 35 टीबी रोगी खोजे गए, 12 का हुआ निदान, 22 रोगी उपचाराधीन
    हापुड़। जिले में सोमवार को 137 स्वास्थ्य एवं कुशलता केंद्रों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स – एचडब्ल्यूसी) के साथ ही सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एकीकृत निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी ने बताया – राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जागरूकता बढ़ाने और क्षय रोगियों को खोजने के लिए आयोजित होने वाले एकीकृत निक्षय दिवस के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। दिसंबर, 2022 में निक्षय दिवस का आयोजन शुरू हुआ था। अब तक हुए 10 निक्षय दिवसों में जनपद में कुल 2995 संभावित क्षय रोगी खोजे गए। जांच के बाद कुल 35 में टीबी की पुष्टि हुई है। उनमें से 12 रोगियों को टीबी निदान हो गया, जबकि 22 उपचाराधीन हैं। एक रोगी को संबंधित जनपद रेफर किया गया है।
    जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया कि एकीकृत निक्षय दिवस पर ओपीडी के 10 प्रतिशत रोगियों की टीबी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, इसके अलावा सामान्य दिनों में ओपीडी में आने वाले पांच फीसदी रोगियों की टीबी जांच की जानी है। सीएमओ डा. सुनील त्यागी के कुशल निर्देशन में लक्षणों के आधार पर सभी संभावित रोगियों के स्पुटम (बलगम) लेने और शत-प्रतिशत स्पुटम की टीबी जांच किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सतीश कुमार ने बताया कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को निर्देश दिए गए हैं कि एकीकृत निक्षय दिवस पर होने वाली ओपीडी में संभावित टीबी रोगी चिन्हित करने के साथ ही निक्षय पोर्टल उनका पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही स्पुटम का नमूना जांच के लिए उसी दिन नजदीकी जांच केंद्र पर पहुंचाना सुनिश्चित करें और जांच रिपोर्ट के हिसाब से फिर निक्षय पोर्टल पर अपडेट करें।
    सरस्वती मेडिकल कॉलेज में हुई कोर कमेटी की बैठक
    जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया कि सोमवार को एनएच-9 स्थित सरस्वती मेडिकल कॉलेज में कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता कॉलेज के उप-प्रधानाचार्य डा. सौरभ गोयल ने की। बैठक में डीटीओ ने निक्षय दिवस पर ओपीडी के 10 प्रतिशत रोगियों और सामान्य दिनों की ओपीडी में लक्षण के आधार पर पांच फीसदी रोगियों की टीबी जांच करना सुनिश्चित करें। इसके साथ फेफड़ों (पल्मोनरी) की टीबी के सभी रोगियों की सीबीनेट जांच अवश्य हो ताकि समय रहते यह पता चल सके कि रोगी को बिगड़ी (मल्टी ड्रग रेसिस्ट – एमडीआर) टीबी तो नहीं हो गई है। बैठक में जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया कि नियमित रूप से टीबी की दवा न खाने वाले रोगियों को एमडीआर टीबी होने का खतरा रहता है, ऐसे रोगियों पर साधारण टीबी की दवा काम करना बंद कर देती हैं। उस स्थिति में दवा बदलने की जरूरत होती है।

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