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जिला पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर टीबी मुक्त की जाएंगी ग्राम पंचायत

  • टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
  • 14 को डीपीआरओ के साथ बैठक के बाद तैयार होगी प्रशिक्षण की रूपरेखा
    हापुड़। वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए तमाम विभाग एक साथ जुटेंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि टीबी मुक्त भारत की शुरूआत सबसे छोटी इकाई, ग्राम पंचायत से होगी। टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का लक्ष्य हासिल करने के लिए जिला पंचायती राज विभाग की सालाना कार्य योजना – ग्राम प्रधान डेवलपमेंट प्रोग्राम ( जीपीडीपी) को अमली जामा पहनाने के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाना है।
    जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने के लिए 14 सितंबर को जिला पंचायती राज अधिकारी ( डीपीआरओ) की अध्यक्षता में चारों ब्लाक के ब्लाक डेवलपमेंट आॅफिसर ( बीडीओ) और एडीओ के साथ बैठक होगी। उसके बाद ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को ब्लाक स्तर पर कार्यशाला का आयोजन कर टीबी के संबंध में तकनीकी जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी।
    डीटीओ ने बताया कि निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही ग्राम सचिव को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनपद हापुड़ में कुल 273 ग्राम पंचायत हैं। प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन हापुड़, सिंभावली, गढ़ और धौलाना ब्लॉक पर अलग अलग तिथियों पर होगा, इसकी जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को पहले से दे दी जाएगी। पंचायती राज विभाग की ओर से पूरे सूबे की 57,349 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान डेवलपमेंट प्रोग्राम भारत सरकार के ई – ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। संबंधित ग्राम पंचायत के टीबी मुक्त होने तक सालाना कार्य योजना तैयार कर ग्राम प्रधान डेवलपमेंट प्रोग्राम का संचालन किया जाएगा। कार्ययोजना को अंतिम रूप देते समय विभिन्न विभागों के ग्राम स्तरीय कार्यकतार्ओं की मौजूदगी रहेगी। पंचायती राज विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाकर क्षय रोगियों को चिन्हित करने और उपचार पर लाने में क्षय रोग विभाग की मदद की जाएगी। जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया- इसके बाद पंचायत राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करने का दावा पेश किया जाएगा, जिस पर जिले और स्वास्थ्य विभाग की कमेटी विचार करेगी और फिर टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र देगी। टीबी मुक्त ग्राम पंचायत को प्रोत्साहित करने के लिए शासन से पुरस्कृत किया जाएगा। यह सब जागरूकता और टीबी के लक्षण आते ही जांच कराने और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर नियमित और पूरा उपचार कराने पर ही सम्भव है। टीबी के लक्षण -दो सप्ताह से अधिक खांसी, खांसी में बलगम और खून आना, सीने में दर्द, बुखार, वजन कम होना और रात में सोते समय पसीना आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं, कोई एक लक्षण आने पर भी टीबी की जांच कराएं, जांच और उपचार की सुविधा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।

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