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जागरूकता से ही टीबी मुक्त होगा भारत : डीएम

  • विश्व क्षय रोग दिवस पर 382 क्षय रोगियों को वितरित किया पोषाहार
  • क्षय रोगियों के लिए काम करने वाली संस्थाओं को दिए प्रशस्ति पत्र
    हापुड़।
    विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर आज हम सभी भारत को टीबी मुक्त करने की शपथ लें, टीबी मुक्त भारत तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति क्षय रोग के प्रति जागरूक हो। टीबी के लक्षण आने पर तत्काल जांच कराई जाए। एक भी व्यक्ति यदि टीबी संक्रमण को मामूली खांसी मानकर जांच कराने में एक-दो महीना देर कर देता है तो वह संपर्क में आने वालों को संक्रमण देता रहता है। टीबी मुक्त भारत के लिए इसका प्रसार रोकना होगा। इसलिए लक्षण आने पर तत्काल जांच कराएं, आपके संपर्क के किसी व्यक्ति को यदि लक्षण हैं तो उसे टीबी केंद्र जाकर जांच कराने के लिए प्रेरित करें, तभी भारत टीबी मुक्त होगा। यह बातें बृहस्पतिवार को विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर दस्तोई रोड स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में विश्व क्षय रोग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने कहीं।
    मुख्य विकास अधिकारी प्रेरणा सिंह ने कहा – 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के लिए सभी जागरूक हों और टीबी के खिलाफ मिलकर जनांदोलन खड़ा करें। जल्दी जांच और जल्दी उपचार शुरू करने से ही टीबी का प्रसार रोका जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचें स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों का आभार भी जताया और इसी तरह मिलकर टीबी के खिलाफ जंग जारी रखने का आह्वान किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. रेखा शर्मा ने टीबी के प्रसार और लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा सरकार के साथ ही सामाजिक संस्थाएं भी क्षय रोगियों की हर संभव सहायता कर रही हैं। नियमित उपचार और बेहतर पोषण के जरिए टीबी को पूरी तरह से हराया जा सकता है, इसके साथ ही हमारा जोर टीबी का प्रसार रोकने पर भी होना चाहिए और यह तभी संभव है जब हम जागरूक होंगे। क्षय रोगियों के लिए जनपद में लगातार काम कर रहे आईएमए, रोटरी क्लब हापुड़, रोटरी क्लब पिलखुआ सिटी, मैरिनो इंडस्ट्रीज, सरस्वती मेडिकल कॉलेज और रामा मेडिकल कॉलेज को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
    जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित क्षय रोगियों को विस्तार से बताया कि क्षय रोग क्यों और कैसे होता है। उन्होंने बताया फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है और सांस व थूक के कणों के साथ संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को भी टीबी का जीवाणु अपनी चपेट में ले लेता है। कई बार इसका असर काफी देर से पता चलता है। इसलिए जरूरी है कि क्षय रोगी खुले और हवादार कमरे में रहें। अन्य लोगों के पास जाने पर अपने मुंह को यथासंभव ढक लें। खांसते और छींकते समय खासतौर पर सावधानी की जरूरत होती है। मॉस्क का प्रयोग करें। कार्यक्रम के दौरान 382 क्षय रोगियों को पोषाहार वितरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान एसीएमओ डा. प्रवीण शर्मा, डा. वेदप्रकाश अग्रवाल, डा. केपी सिंह और डा. जेपी त्यागी, आईएमए हापुड़ से डा. आनंद प्रकाश, डा. अंजना सक्सेना, जिला अस्पताल से डा. सीएमएस डा. प्रदीप मित्तल, शीषपाल सिंह और डा. परविंदर वर्मा, क्षय रोग विभाग से पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी और जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में डा. मयंक चौधरी, डा. मारुफ चौधरी और डीपीसी परीक्षित तेवतिया का विशेष सहयोग रहा।

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