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33 स्विस पर्यटकों का समूह वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचा

  • पर्यटकों का स्वागत शहनाई की धुन और धोबिया लोक नृत्य से किया गया
  • प्रधानमंत्री 13 जनवरी, 2023 को गंगा विलास क्रूज को डिब्रूगढ़ के लिए रवाना करेंगे
    लखनऊ।
    गंगा विलास क्रूज से डिब्रूगढ़ जाने वाले 33 स्विस पर्यटकों का समूह वाराणसी बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचा। यहां पर्यटकों का स्वागत शहनाई की धुन और धोबिया लोक नृत्य से किया गया। बाबतपुर से लग्जरी वाहन से पर्यटकों को रामनगर स्थित पोर्ट पर ले जाया गया।
    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी, 2023 को गंगा विलास क्रूज को वर्चुअल माध्यम से डिब्रूगढ़ के लिए रवाना करेंगे। रामनगर में क्रूज पर सवार होने के बाद शाम को पर्यटक रामनगर किले का भ्रमण करेंगे। इसके बाद नौका विहार करते हुए गंगा आरती देखेंगे। आरती देखने के बाद वापस क्रूज पर आएंगे और रात्रि विश्राम पर्यटक गंगा विलास क्रूज पर ही करेंगे। 11 जनवरी, 2023 को चुनार किले का भ्रमण करने जाएंगे। यहां से मिजार्पुर स्थित घण्टाघर जाएंगे। 12 जनवरी, 2023 को इन पर्यटकों के लिए रविदास घाट पर सांस्कृतिक आयोजन होंगे। पर्यटकों के ग्रुप में 32 पर्यटक और एक जर्मन गाइड शामिल हैं। पर्यटकों का दल दिल्ली से एयर इंडिया के विमान से वाराणसी पहुंचा है।
    क्रूज रामनगर बंदरगाह से वाराणसी के संत रविदास घाट पर पहुंचेगा
    कोलकाता से 22 दिसम्बर, 2022 को रवाना हुआ गंगा विलास लग्जरी क्रूज मंगलवार को जनपद वाराणसी पहुंच गया है। क्रूज रामनगर बंदरगाह से वाराणसी के संत रविदास घाट पर पहुंचेगा। यहां पर उसका भव्य स्वागत होगा।
    ज्ञातव्य है कि दुनिया के सबसे लम्बे जलमार्ग पर चलने वाले गंगा विलास क्रूज यात्रा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 जनवरी, 2023 को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री इस लग्जरी क्रूज को वाराणसी से डिब्रूगढ़़ के लिए रवाना करेंगे। 51 दिनों तक एडवेंचरस सफर पर निकलने वाला यह क्रूज 15 दिनों तक बांग्लादेश से गुजरेगा। इसके बाद असम के बह्मपुत्र नदी से डिब्रूगढ़ तक जाएगा। यह क्रूज उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और असम के कुल 27 रिवर सिस्टम से गुजरेगा। इसमें रास्ते में तीन मुख्य नदियां गंगा, मेघना और ब्रह्मपुत्र पड़ेंगी। क्रूज बंगाल में गंगा की सहायक और दूसरे नामों से प्रचलित भागीरथी, हुगली, बिद्यावती, मालटा, सुंदरवन रिवर सिस्टम, वहीं बांग्लादेश में मेघना, पद्मा, जमुना और फिर भारत में ब्रह्मपुत्र से असम में प्रवेश करेगा। भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल की वजह से यह यात्रा बांग्लादेश को क्रॉस करेगी। क्रूज यात्री 15 दिनों तक बांग्लादेश में पर्यटन करेंगे।

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